
प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से एक साल पहले ग्रामीण वोटरों को लुभाने के लिए मास्टर स्ट्रोक खेला है। पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों की पावर बढ़ा दी है, जिसके लिए वे लंबे समय से मांग कर रहे थे, जबकि उनका आधा कार्यकाल भी बीत चुका है। अब जिला परिषद अध्यक्ष को सीईओ की एसीआर लिखने की पावर दी है। पहली बार 20 करोड़ रुपए का बजट भी दिया है। कुछ विभागों के काम भी जिला परिषद को दिए जाएंगे। गांवों में पानी के बिल भी तय करेगी। गुरुवार को पंचकूला में हुई अंतर जिला परिषद की पहली बैठक में जिप, नगर परिषद अध्यक्षों, नगर निगमों के चेयरमैन और हर जिलों से एक-एक सरपंच बुलाया था।
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